Found this gem on net. Hats off to the anonymous poetess who penned these lines.
ये दिल तुझे इतनी शिद्दत से चाहता क्यों है
हर साँस के साथ तेरा ही नाम आता क्यों है
तू कितना भी मुझसे तल्के ताल्लुक रख ले
ज़िक्र फिर भी तेरा मेरी ज़बान पे आता क्यों है
यूं तो हैं कई फासले तेरे मेरे बीच
लगता फिर भी तू मुझको मेरी जान सा क्यों है
तेरी फुरकत में तड़पने की हो चुकी है आदत मेरी
तेरे दूर होने का फिर भी एहसास मुझको रुलाता क्यों है
ये जानती हूँ के तुझको नहीं मोहब्बत मुझसे
मगर फ़िर भी लब पे मेरे तेरा ही नाम आता क्यों है
है यकीन तुझको पाना न होगा मुमकिन मेरे लिए
ये दिल फिर भी रोज़ उम्मीद की शमा जलाता क्यों है
महसूस की है बेरुखी तेरी बातों में कई बार मैंने
लहजा वो फिर भी तेरा मुझको इतना भाता क्यों है
है ख़बर मुझको निकालेगा तू मेरी चाहत का जनाज़ा एक दिन
मन मेरा फिर भी तेरे ख्वाब सजाता क्यों है
गर बिछड़ना ही है तो खुदा हमको मिलाता क्यों है '
कमसिन' को आखिर वो इतना सताता क्यों है
दिल मेरा तुझको इतनी शिद्दत से चाहता क्यों है
हर साँस के साथ तेरा ही नाम आता क्यों है
Wednesday, July 9, 2008
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