Wednesday, July 9, 2008

  1. God, the 'Sorry' reciver & transmitter (बन्दा - हे भगवान् मुझे माफ़ कर दो. भगवन - भाई तुमने मेरा क्या बिगाडा?)

  2. God, the Superman (बन्दा - भाई ये तो भगवान् ही कर सकता है. भगवान् - तुम्हे कैसे पता?)

  3. God, the Scapegoat (बन्दा - हे भगवान् ये तूने क्या किया? भगवान् - हैं? मैंने?)

  4. God, the Santa Claus (बन्दा - हे भगवान् मुझे घर दिला दो, पैसे दिला दो और उस कन्या से मेरा विवाह भी..... भगवान् - -----------------------)

  5. God, the Ghost buster (बन्दा - भूत पिशाच निकट नही आवे....भगवान् - भाई सच कहूँ? इस वाले से तो मुझे भी घबराहट हो रही है)

  6. God, the Humility-badge (बन्दा - ये सब तो भगवान् का दिया हुआ है. भगवान् - धुत्त! मैंने दिया होता और अच्छा होता)

  7. God, the Bodyguard (बन्दा - इस बार बचा ले नीली छतरी वाले. भगवान् - मुसीबत तुमने मोल ली मैं कैसे बचाऊ अब?)

  8. God, the Plastic Surgeon (बन्दा - भगवान् ने क्या सूरत दी है. भगवान् - ना बन्दे सूरत तो माता-पिता के genes से मिलती है

  9. God, the Encyclopedia (बन्दा - अब ये तो भगवान् हे जाने. भगवान् - -----------------------)

  10. God, the Socialist (बन्दा - भगवान् के आगे सब बराबर हैं. भगवान् - अब जाके सही कहा कुछ!)


When I was a child, and was just discovering my adoration for music and lyrics, I used to sit with pen and paper in hand and write down the lyrics as I listened to them on my ancient 'khataaraa' tape recorder. I remember I caused two of the said machines to be thrown into the dust bin because of the over-use of the Play, Rewind and Fast Forward buttons. Not to forget the kilos of discarded cassettes that my kabaadi wallah took with him every year.

Many years later, I observed in myself the familiar hankering to note down the lyircs of a song. Since somewhere along those years pen and paper had been replaced by an electronic notebook and the tape recorder had found an able succesor in the Real Player, I typed along the lyrics on my blogger page as I played and rewound over and over again this Shantanu Moitra ode.

Honestly speaking, I wanted to fill this third paragraph with words to describe this song and how this song made me feel. Unfortunately, I am unable to do so. I have typed and deleted so many tentative words and sentences, that I think it is much better if I, for once, leave my verbosity behind and let the song itself take center stage.

Here it goes!

आज शब जो चाँद ने है रूठने की ठान ली
गर्धिशों में हैं सितारे , बात हमने मान ली
अँधेरी स्याह ज़िंदगी को सूझती नहीं गली
के आज हाथ थाम लो एक हाथ की कमी खली

क्यों खोया खोया चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल?
क्यों अपने आप से खफा खफा ज़रा ज़रा सा नाराज़ है दिल?

ये मंजिलें भी ख़ुद ही तय करें
ये फासले भी ख़ुद ही तय करें

क्यों तो रास्तों पे फिर सेहेम सेहेम संभल संभल के चलता है ये दिल?
क्यों खोया खोया चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल?

ज़िंदगी सवालों के जवाब ढूँढने चली
जवाब में सवालों की एक लम्बी सी लड़ी मिली
सवाल ही सवाल हैं , सूझती नही गली
के आज हाथ थाम लो, एक हाथ की कमी खली


जी मे आता है, मुर्दा, सितारे नोच लूँ
इधर भी, नोच लूँ, उधर भी, नोच लूँ
एक दो का ज़िक्र क्या , मैं सारे नोच लूँ
मैं सारे नोच लूँ

इधर भी नोच लूँ उधर भी नोच लूँ
सितारे नोच लूँ मैं सारे नोच लूँ

इधर भी नोच लूँ उधर भी नोच लूँ
सितारे नोच लूँ मैं सारे नोच लूँ


क्यों तू आज इतना वहशी है, मिजाज में मजाज़ है गम--दिल?
क्यों अपने आप से खफा खफा ज़रा ज़रा सा नाराज़ है दिल?

ये मंजिलें भी ख़ुद ही तय करें ये फासले भी ख़ुद ही तय करें

क्यों तो रास्तों पे फिर सहम सहम संभल संभल के चलता है ये दिल?
तो रास्तों पे फिर सहम सहम संभल संभल के चलता है ये दिल?

क्यों खोया खोया चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल?
खोया खोया चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल?


दिल को समझाना, कह दो क्या, आसान है?
दिल तो, फितरत से, सुन लो ना, बेइमान है
ये खुश नही है जो मिला, बस मांगता ही है चला
जानता है, हर लगी का, दर्द ही है बस इक सिला

जब कभी ये दिल लगा , दर्द ही हमें मिला
दिल की हर लगी का सुन लो दर्द ही है इक सिला

जब कभी ये दिल लगा, दर्द ही हमें मिला
दिल की हर लगी का सुन लो दर्द ही है इक सिला

क्यों नए नए से दर्द की फिराक में तलाश में उदास है दिल?
क्यों अपने आप से खफा खफा ज़रा ज़रा सा नाराज़ है दिल?

ये मंजिलें भी ख़ुद ही तय करें ये फासले भी ख़ुद ही तय करें

क्यों तो रास्तों पे फिर सहम सहम संभल संभल के चलता है ये दिल?

क्यों खोया खोया चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल?
क्यों अपने आप से खफा खफा ज़रा ज़रा सा नाराज़ है दिल?

ये मंजिलें भी ख़ुद ही तय करें ये फासले भी ख़ुद ही तय करें

क्यों तो रास्तों पे फिर सहम सहम संभल संभल के चलता है ये दिल?
क्यों तो रास्तों पे फिर सहम सहम संभल संभल के चलता है ये दिल?
क्यों खोया खोया चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल?
क्यों खोया खोया चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल?

Movie - Khoya Khoya Chaand
Singers - Ajay Jhingaran, Swanand Kirkire
Lyricist - Swanand Kirkire
Music Director - Shantanu Moitra
Found this gem on net. Hats off to the anonymous poetess who penned these lines.

ये दिल तुझे इतनी शिद्दत से चाहता क्यों है
हर साँस के साथ तेरा ही नाम आता क्यों है

तू कितना भी मुझसे तल्के ताल्लुक रख ले
ज़िक्र फिर भी तेरा मेरी ज़बान पे आता क्यों है

यूं तो हैं कई फासले तेरे मेरे बीच
लगता फिर भी तू मुझको मेरी जान सा क्यों है

तेरी फुरकत में तड़पने की हो चुकी है आदत मेरी
तेरे दूर होने का फिर भी एहसास मुझको रुलाता क्यों है

ये जानती हूँ के तुझको नहीं मोहब्बत मुझसे
मगर फ़िर भी लब पे मेरे तेरा ही नाम आता क्यों है

है यकीन तुझको पाना न होगा मुमकिन मेरे लिए
ये दिल फिर भी रोज़ उम्मीद की शमा जलाता क्यों है

महसूस की है बेरुखी तेरी बातों में कई बार मैंने
लहजा वो फिर भी तेरा मुझको इतना भाता क्यों है

है ख़बर मुझको निकालेगा तू मेरी चाहत का जनाज़ा एक दिन
मन मेरा फिर भी तेरे ख्वाब सजाता क्यों है

गर बिछड़ना ही है तो खुदा हमको मिलाता क्यों है '
कमसिन' को आखिर वो इतना सताता क्यों है

दिल मेरा तुझको इतनी शिद्दत से चाहता क्यों है
हर साँस के साथ तेरा ही नाम आता क्यों है

१ अपने होने ना होने से होता है क्या? काम दुनिया का यूं भी तो चल जायेगा! (ज़ाहिद)

ग़ालिब-ऐ-खास्ता के बगैर कौन से काम बंद हैं? रोईए ज़ार ज़ार क्यों, कीजिये हाय हाय क्यों? (ग़ालिब)

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ (अहमद फ़राज़)

कतई कीजे ना ताल्लुक हमसे कुछ नहीं है तो अदावत ही सही (ग़ालिब)

३बेखुदी ले गई कहाँ हमको? देर से इंतज़ार है अपना! (मीर)

हम वहाँ हैं जहाँ से, हमको कुछ हमारी ख़बर नहीं आती (ग़ालिब)

कहाँ मयखाने का दरवाजा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइज़? पर इतना जानते हैं की कल वो जाता था की हम निकले (ग़ालिब)

मयखाने की बात ना कर वाइज़ मुझसे आना जाना तेरा भी है मेरा भी! (शाहिद कबीर)

शेख जो था मस्जिद मे नंगा, रात को था मयखाने जुब्बह, खिरका, कुरता, टोपी, मस्ती मे इनाम किया! (मीर)

५ मयकदे बंद करें लाख ज़माने वाले, कम नहीं हैं आंखों से पिलाने वाले

इक सिर्फ़ हमीं हैं जो आंखों से पिलाते हैं, कहने को तो दुनिया मे मयखाने हजारों हैं (शहरयार

६सब करिश्मात-ऐ-तसव्वुर है 'शकील', वरना आता है ना जाता है कोई (शकील)

रात भर पिछली ही आहट कान मे आती रही, झाँक कर देखा गली मे कोई भी आया न था (अदीम)

७ नहीं फुरसत यकीन मानो हमें कुछ और करने की तेरी बातें तेरी यादें बहुत मसरूफ रखती है

उनकी याद, उनकी तमन्ना, उनका गम कट रही है ज़िंदगी आराम से

८।दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन मे समाई? काहे को दुनिया बनाई?

नक्श फरियादी है ये किसकी शोखी-ऐ-तहरीर का? कागजी है पैरहन हर पैकर-ऐ-तस्वीर का (ग़ालिब)

९। ये इश्क नहीं आसान, इतना तो समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है

शायद इसी का नाम मुहब्बत है, 'शेफ्ता' इक आग सी है दिल मे हमारे लगी हुई (शेफ्ता)

१०। उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िंदगी हर शेह जहाँ हसीं थी, हम तुम थे

अजनबी
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों (साहिर लुधियानवी)